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भारत में परिवहन क्षेत्र की खपत कुल ऊर्जा खपत का 18% है। यह लगभग 94 मिलियन टन तेल (एमटीओई) ऊर्जा खर्च करने के बराबर है। यदि भारत को ऊर्जा की खपत के मौजूदा रुझानों के अनुसार चलना है, तो उसे इस क्षेत्र की मांग को पूरा करने के लिए वर्ष 2030 तक सालाना लगभग 200 एमटीओई ऊर्जा आपूर्ति की आवश्यकता होगी। वर्तमान में, यह मांग अधिकतर कच्चे तेल का आयात करके पूरी की जा रही है, जो इस क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण असुरक्षित बनाता है। इसके अलावा, यह क्षेत्र प्रतिवर्ष 142 मिलियन टन सीओ2 का उत्सर्जन करता है, जिसमें से 123 मिलियन टन अकेले सड़क परिवहन क्षेत्र के कारण होता है।

2005 के स्तर से 2030 तक उत्सर्जन की तीव्रता को 33-35% कम करने के लिए पेरिस में आयोजित सीओपी21 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत सरकार द्वारा की गई जलवायु परिवर्तन प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए, परिवहन क्षेत्र में वैकल्पिक साधनों को अपनाना उचित होगा, जो भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि, बढ़ते शहरीकरण, यात्रा मांग और देश की ऊर्जा सुरक्षा से उत्‍पन्‍न हो सकती हैं। यदि नया मूल्य-निर्धारण समाधान, उपयुक्त प्रौद्योगिकी और समर्थन बुनियादी ढांचे के साथ पैकज दिया जाए तो इलेक्‍ट्रिक वाहन इन चुनौतियों का समाधान करने में एक व्यावहारिक विकल्प प्रस्तुत कर सकते हैं, और इसलिए भारत सरकार इस पर ध्‍यान दे रही है।

इलेक्‍ट्रिक वाहन ऊर्जा मांग, ऊर्जा भंडारण और पर्यावरणीय स्थिरता को बनाए रखने में भी योगदान करेंगे। इलेक्‍ट्रिक वाहन ऊर्जा उत्पादन में उपयोग होने वाले प्राथमिक ऊर्जा स्रोतों के व्यापक मिश्रण पर अपनी निर्भरता के कारण लोगों और वस्तुओं को लाने-ले जाने के लिए ऊर्जा में आवश्यक विविधता लाने में मदद कर सकते हैं, जिससे ऊर्जा सुरक्षा में काफी सुधार होता है। इसका श्रेय उनकी भंडारण क्षमता के को जाता है, वे स्वच्छ बिजली लेने में मदद कर सकते हैं, जिससे बिजली उत्पादन में परिवर्तनशील नवीकरणीय ऊर्जा का अधिक उपयोग हो सके। यदि इसके साथ बिजली क्षेत्र को डिकार्बुराइज किया जाए, तो इलेक्ट्रिक वाहन भी दुनिया को अपने महत्वपूर्ण जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए में प्रमुख योगदान प्रदान करेंगे।

इलेक्‍ट्रिक वाहन स्थानीय वायु प्रदूषकों के शून्य या अल्ट्रा-लो-टेलपाइप उत्सर्जन और बहुत कम शोर के साथ आते हैं, और, मोटर वाहन क्षेत्र के लिए सबसे नवीन समूहों में से एक होने के कारण ये आर्थिक और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे सकते हैं तथा विशेष रूप से देशों में निवेश आकर्षित कर सकते हैं।

भारत में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग की कुल वाहन बिक्री 1% से भी कम है जो काफी कम है। वर्तमान में, भारतीय सड़कों पर पारंपरिक वाहनों की बहुलता है और लगभग 0.4 मिलियन इलेक्ट्रिक दोपहिया और कुछ हजार इलेक्ट्रिक कारें हैं। भारतीय ईवी उद्योग विभिन्न चुनौतियों के कारण पिछड़ रहा है।

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण और उन्‍हें अपनाए जाने को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने कई पहल की हैं। सरकार के समर्थन से, इलेक्ट्रिक वाहनों ने भारतीय बाजार में अपनी पैठ बनानी शुरू की है। तथापि, भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने के लिए पर्याप्त चार्जिंग अवसंरचना की उपलब्धता एक प्रमुख आवश्यकता है।

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाने के लिए पर्याप्त चार्जिंग सुविधा की उपलब्धता एक मुख्य आवश्यकता है। इस संबंध में, देश भर में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाने के लिए, केंद्र और राज्य स्तर पर विभिन्न हितधारकों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए, विद्युत मंत्रालय ने "इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग अवसंरचना - दिशानिर्देश और मानक" जारी किए हैं। विद्युत मंत्रालय ने देश में चार्जिंग के बुनियादी ढांचे की राष्ट्रीय स्तर पर शुरुआत के लिए ऊर्जा दक्षता ब्‍यूरो (बीईई) को केंद्रीय नोडल एजेंसी (सीएनए) के रूप में नामित किया है।

इलेक्ट्रिक वाहन के बारे में

इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) इलेक्ट्रिक मोटरों द्वारा चलाए जाते हैं जो बैटरी में संग्रहीत ऊर्जा द्वारा संचालित होते हैं। ईवी में एक आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) के बजाय एक इलेक्ट्रिक मोटर होती है। चूंकि ईवी बिजली से चलती है, इसलिए वाहन की टेलपाइप से कोई उत्‍सर्जन नहीं होता है अर्थात् इसमें टेल पाइप से शून्य उत्सर्जन होता है और इसमें ईंधन पंप, ईंधन लाइन या ईंधन टैंक जैसे घटक नहीं लगे होते हैं।

                                                    चित्र 1: आंतरिक दहन इंजन वाहन और इलेक्ट्रिक वाहन के घटक

आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) वाहन की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चुनने के फायदे

अन्य लाभ:

  1. क. किफायती:

    • ईवी में आईसीई की तुलना में घूमने वाले पुर्जे कम होते हैं, इस प्रकार ईवी को कम रखरखाव की आवश्यकता होती है।

    • उच्च दक्षता, कम ईंधन लागत और कम परिचालन लागत आईईसी वाहनों की तुलना में ईवी को किफायती बनाती है।

  2. ख. बेहतर वायु गुणवत्ता:

    • आईसीई वाहनों की तुलना में ईवी में कोई टेलपाइप उत्सर्जन नहीं होता है। ईवी को अपनाने से स्थानीय वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।

    • ईवीएस को अपनाने से ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन कम हो जाएगा जो आईसीई वाहन चलाने से उत्सर्जित होता है।

  3. ग. सुविधा:

    • ईवी में कोई गियर नहीं होता और आईसीई वाहनों की तुलना में इसे ड्राइव करना बहुत आसान है।

    • दहन और यांत्रिक ड्राइव ट्रेन के न होने से ईवीएस में कोई आवाज़ नहीं होती।

    अन्य लाभ:

    • घर पर आसानी से चार्ज करें

    • सरकार से ईवी मालिकों को अग्रिम प्रोत्साहन

    • आईसीई वाहनों को स्क्रैप करने के लिए प्रोत्साहन

    • ईवी मालिक धारा 80ईईबी के तहत 150,000 रुपए तक की आयकर कटौती का दावा कर सकते हैं

    • देश की आयातित जीवाश्म ईंधन की आवश्यकता कम होती है।

इलेक्ट्रिक वाहन से जुड़े मिथक

  1. परिवहन क्षेत्र उत्सर्जन का बड़ा कारक नहीं है

    परिवहन क्षेत्र से विश्‍व स्‍तर पर 23% जीएचजी उत्सर्जन होता है। वाहनों के उत्सर्जन पर नई दिल्ली में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि परिवहन क्षेत्र से पार्टिकुलेट मैटर काफी अधिक बढ़ता है और एनओएक्‍स उत्सर्जन से सांस संबंधी बीमारियां उत्‍पन्‍न होती हैं। ईवी को अपनाने से वाहनों के उत्सर्जन को काफी हद तक कम किया जा सकता है, इस प्रकार एक स्वस्थ जीवन शैली बनाई जा सकती है।

  2. ईवी को चार्ज करने में बहुत अधिक समय लगता है

    ईवी चार्जिंग का समय चार्जिंग के लिए अपनाए गए चार्जर के प्रकार पर निर्भर करता है। वर्तमान में विविध वाहन में उपलब्ध ईवी (दो-पहिया, तिपहिया, चार-पहिया) को धीमा/ मध्‍यम चार्जर्स से 1-5 घंटे में 0%-80% तक चार्ज किया जा सकता है जबकि ईवी को 1 घंटे से कम समय में चार्ज किया जा सकता है। फास्ट चार्जर्स का उपयोग मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक चार-पहिया वाहनों को चार्ज करने के लिए किया जाता है। चार्ज की दर सेल केमिस्ट्री पर भी निर्भर करती है।

  3. ईवी महंगी होती है

    हालाँकि, ईवीएस की लागत अधिक हो सकती है, ईवीएस की मालिकाना कुल लागत (टीसीओ) काफी कम है, क्योंकि चार्ज, रखरखाव और परिचालन लागत आईसीई वाहनों की तुलना में बहुत कम है। इसके अलावा, केंद्र/ राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली अग्रिम सब्सिडी ईवी की समग्र लागत को कम करती है। अस्थायी टीसीओ का अनुमान लगाने के लिए कैलकुलेटर नीचे दिए गए लिंक पर उपलब्ध है:

  4. ईवी में रेंज कम होती है

    ईवी में उच्च घनत्व वाली बैटरी लगाए जाने से बैटरी की भंडारण क्षमता में वृद्धि हुई है, जिससे ईवी की रेंज में सुधार हुआ है। वर्तमान में बाजार में उपलब्ध इलेक्ट्रिक दो-पहिया वाहनों की औसत रेंज लगभग 84 कि.मी. प्रति चार्ज है जो शहर के भीतर दिन-प्रतिदिन की यात्रा के लिए पर्याप्त है और बाजार में उपलब्ध इलेक्ट्रिक कारों की औसत रेंज 150-200 कि.मी. प्रति चार्ज के बीच है। इसके अलावा, वाहन के नए मॉडलों में बैटरी क्षमता और रेंज अधिक होती है।

  5. ईवी सुरक्षित नहीं हैं

    ईवी सुरक्षित हैं क्योंकि सभी ईवी कठोर सुरक्षा परीक्षण से गुजरती हैं। अधिकांश ईवी निर्माताओं द्वारा बैटरी में आग और विस्फोट के जोखिम की चुनौती का अपनी दक्ष और बौद्धिक बैटरी प्रबंधन प्रणाली (बीएमएस) से समाधान किया जा रहा है जो बैटरियों की कूलिंग, ताप, इन्सुलेशन और वेंटिलेशन आदि का कार्य करती है। प्रमाणन एजेंसियां, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (आईसीएटी) ओवरचार्ज, शॉर्ट सर्किट और कंपन की दृष्‍टि से कठोर परीक्षण करती हैं। इस प्रकार, ईवी को चलाना सुरक्षित है।

  6. ईवी की गति धीमी होती है

    ईवी उच्च गति वाली पावरट्रेन से लैस हैं इसलिए ईवी बेहतर गति और स्‍पीड प्रदान करती है। जहां तक ​​गति का संबंध है, भारतीय बाजार में उपलब्ध ईवी में चयनित/ चुने गए मॉडल के आधार पर शीर्ष गति होती है। आईसीई वाहनों की तुलना में ईवी में एक उच्च शुरुआती टॉर्क होता है और तेजी से बढ़ता है।

  7. ईवी बैटरियों को बार-बार बदलने की आवश्यकता होती है

    आज ईवी बैटरी की इलेक्ट्रिक दो-पहिया, तिपहिया और चार-पहिया श्रेणियों में 3 से 8 साल की वारंटी है। वाहन के उपयोग के आधार पर वास्तविक बैटरी वारंटी भिन्न हो सकती है।

  8. पर्याप्त ईवी चार्जिंग स्टेशन नहीं हैं

    सरकार भारत में फॉस्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग (हाइब्रिड एंड) इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, (एफएएमई) इंडिया स्कीम फेज II और राज्य स्तर की पहलों के माध्यम से पूंजी सब्सिडी प्रदान करके ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाने पर जोर दे रही है। इसके अलावा, सरकार ने निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ाने और बाजार अपनाने की सुविधा के लिए ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की गतिविधि को लाइसेंस मुक्‍त किया है। इस प्रकार, आने वाले वर्षों में ईवी मालिकों के लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन (पीसीएस) पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होंगे।

इलेक्ट्रिक वाहनों पर प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. ईवी क्या है?
    ईवी, रिचार्जेबल बैटरी वाले इलेक्ट्रिक वाहन हैं जिन्हें बाहरी स्रोत से बिजली द्वारा चार्ज किया जा सकता है।

  2. ईवी आपूर्ति उपकरण (ईवीएसई) क्या है?
    ईवीएसई में ईवी के लिए बाहरी विद्युत उपकरण लगा होता हैं जो एक ईवी को चार्ज करने के लिए एक बिजली स्रोत के रूप में कनेक्शन प्रदान करता है। यह स्मार्ट मीटरिंग, सेलुलर क्षमता और नेटवर्क कनेक्टिविटी जैसी उन्नत सुविधाओं से लैस होता है।

  3. चार्जिंग अवसंरचना के विभिन्न विनिर्देश क्या हैं?
    विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार चार्जिंग बुनियादी ढांचे के विनिर्देश:

                                                      तालिका 1: चार्जिंग अवसंरचना के विनिर्देश

    चार्जर का प्रकार

    चार्जर कनेक्टर्स*

    रेटेड आउटपुट वोल्टेज

    कनेक्टर गन (सीजी) की संख्या (सीजी)

    चार्जिंग ईवी टाइप

    तेज

    संयुक्‍त चार्जिंग प्रणाली (सीसीएस) (न्‍यूनतम 50 कि.वॉट)

    200 – 750 या अधिक

    1 सीजी

    चार पहिया

    चार्ज डी मूव (सीएचएडीमो) (न्‍यूनतम 50 कि.वॉट)

    200 – 500 या अधिक

    1 सीजी

    चार पहिया

    टाइप – 2 एसी (मिनट 22 कि.वॉट)

    380 – 415

    1 सीजी

    चार पहिया, तिपहिया, दुपहिया

    धीमा/ मध्‍यम

    भारत डीसी-001 (15 कि.वॉट)

    48

    1 सीजी

    चार पहिया, तिपहिया, दुपहिया

    भारत डीसी-001 (15 कि.वॉट)

    72 या अधिक

    1 सीजी

    चार पहिया

    भारत एसी – 001 (10 कि.वॉट)

    230

    प्रत्‍येक 3.3 कि.वॉट के 3 सीजी

    चार पहिया, तिपहिया, दुपहिया

    *इसके अलावा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी)/ भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) मानकों द्वारा अनुमोदित किसी भी अन्य तेज/ मध्‍यम/ धीमा चार्जर को जब भी अधिसूचित किया जाता है।
    टिप्‍पण: टाइप - 2 एसी (न्यूनतम 22 कि.वॉट) एडॉप्टर की मदद से इलेक्ट्रिक दुपहिया/ तिपहिया वाहन को चार्ज किया जा सकता है।

  4. ईवी के प्रकार क्या हैं?
    ईवी में शुद्ध बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (बीईवी) के अलावा, प्लग इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन (पीएचईवी) और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन (एचईवी) शामिल हैं। पीएचईवी में पेट्रोल/ डीजल और बिजली दोनों का उपयोग किया जा सकता है। इन वाहनों में दो पावर सिस्टम, एक आंतरिक दहन इंजन और एक बैटरी होती है। वाहन को बाहरी स्रोत में लगाकर बैटरी को रिचार्ज किया जा सकता है। एचईवी इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के साथ पारंपरिक आईसीई सिस्टम को जोड़ती है। वे ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिए रिजेनरेटिव ब्रेकिंग का उपयोग करते हैं जो आमतौर पर बिजली में ब्रेक लगाने के दौरान व्‍यर्थ हो जाती है। यह बिजली एक बैटरी में संग्रहीत होती है।

                                       चित्र 3: इलेक्ट्रिक वाहन                                                         Figure 2: Plug-in Hybrid Electric Vehicle

    Figure 2: Plug-in Hybrid Electric Vehicle

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     Electric Vehicle Plug-in Hybrid Electric Vehicle

     Hybrid Electric Vehicle

                                                                                   चित्र 4: हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन

  5. क्या आईसीई वाहनों की तुलना में ईवी कम प्रदूषणकारी हैं?
    पारंपरिक पेट्रोल/ डीजल वाहन और संपीडित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) वाहन उत्सर्जन में तेजी लाते हैं जो वाहनों के उत्सर्जन का एक प्रमुख कारण है। बैटरी संचालित वाहनों में शून्य टेलपाइप और शोर उत्‍पन्‍न होता है।

  6. ईवी को चार्ज करने में कितना समय लगता है?
    लगभग 30 कि.वॉट बैटरी पैक वाली एक इलेक्ट्रिक कार को फास्ट चार्जर (50 कि.वॉट) का उपयोग करते हुए अपनी बैटरी की क्षमता का 80% तक चार्ज करने में 1 घंटे से भी कम समय लगता है, जबकि चार्जिंग का समान प्रतिशत प्राप्त करने के लिए, धीमे/ मध्‍यम चार्जर (15 ए प्लग) से लगभग 8 घंटे लगते हैं।

  7. ईवी को चार्ज करने में कितना खर्च होता है?
    एकल चार्ज (होम चार्ज) की लागत अधिसूचित राज्य ईवी टैरिफ और वाहन की बैटरी क्षमता के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसका इस फॉर्मूले से अनुमान लगाया जा सकता है = बैटरी क्षमता (कि.वॉट में) X ईवी चार्जिंग टैरिफ (रुपए/ कि.वॉट घंटा में) (राज्य ईवी टैरिफ देखें)।

  8. क्या आईसीई वाहन की तुलना में समय के साथ ईवी चलाना महंगा पड़ता है?
    आईसीई समकक्ष की तुलना में ईवी खरीदने की लागत काफी अधिक होती है। हालांकि, ईवी को चार्ज करने, रखरखाव और संचालन करने की लागत आईसीई वाहन से कम होती है जो ईवी के टीसीओ को कम करता है। उदाहरण के लिए, टाटा टिगोर और टाटा टिगोर ईवी की गणना की गई है। दावा किया जाता है कि टाटा टिगोर की अनुमानित रेंज लगभग 20 किलोमीटर प्रति लीटर है। मान लें कि यह 100 किलोमीटर चलती है, तो इससे लगभग 5 लीटर पेट्रोल की खपत होगी। 08 फरवरी 2021 को पेट्रोल की लागत 86.95 रुपए प्रति लीटर थी। इसलिए, 100 किलोमीटर की यात्रा की लागत 434.75 रुपए है। टाटा टिगोर ईवी, 21.5 कि.वॉट घंटा की कुल बैटरी क्षमता के साथ, ईवी चार्ज करने की कुल लागत 21.5 कि.वॉट घंटा x 4.5 रुपए प्रति कि.वॉट घंटा होगी (दिल्ली के लिए ईवी होम चार्जिंग टैरिफ मानते हुए), अर्थात् लगभग 96.75 रुपए। इसलिए आईसीई वाहन की तुलना में ईवी चलाना अधिक किफायती है।

  9. मैं अपनी ईवी को कहां से चार्ज कर सकता हूं?
    ईवी को पीसीएस या आपके घर पर चार्ज किया जा सकता है। सरकार तेज गति से पीसीएस लगा रही है ताकि ईवी मालिक अपने वाहनों को आसानी से चार्ज कर सकें। इसके अलावा, कई तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) अपने तेल खुदरा बिक्री केंद्रों/ ईंधन पंपों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित कर रही हैं ताकि ईवी मालिक चार्जिंग स्टेशनों का आसानी से पता लगा सकें।

  10. मैं अपने आस-पास ईवी चार्जिंग स्टेशन का कैसे पता लगा सकता हूं?
    अनेक प्रौद्योगिकी प्रदाता (अर्थात् नेटवर्क सेवा प्रदाता) मोबाइल आधारित ऐप का विकास कर रहे हैं जो निकटतम पब्‍लिक चार्जिंग प्‍वाइंट स्थान, अपेक्षित प्रतीक्षा समय और चार्जिंग की लागत के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे।

  11. क्या ईवी सुरक्षित हैं?
    सभी ईवी बैटरियों को राष्‍ट्रीय परीक्षण और अंशांकन प्रत्यायन बोर्ड प्रयोगशालाओं (एनएबीएल) प्रमाणित में कड़ी परीक्षण प्रक्रियाओं से गुजरा जाता हैं। भारत में एआरएआई, आईसीएटी जैसी प्रमाणन एजेंसियां ​​ ईवी और चार्जर को प्रमाणित करती हैं। इस प्रकार, ईवी को चलाना सुरक्षित है।

  12. ईवी की खरीद के लिए सरकार से क्या लाभ मिलते हैं?
    केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकारें भी वित्तीय और गैर-राजकोषीय प्रोत्साहन प्रदान करके ईवी को अपनाने को प्रोत्‍साहित कर रही हैं। ईवी की खरीद पर दिए जा रहे कुछ प्रोत्साहन इस प्रकार हैं: • फेम इंडिया स्कीम फेज II के तहत अपफ्रंट पूंजीगत राजसहायता • ईवी पर माल और सेवा कर (जीएसटी) को 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है, • ईवी की खरीद हेतु लिए गए ऋण पर दिए गए ब्याज पर आयकर कटौती का दावा किया जा सकता है।

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    इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को केंद्र सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि

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    राष्ट्रीय/ राज्य इलेक्ट्रिक वाहन नीतियां और विनियम

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    विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी किए गए विनियम

     

    अन्य मंत्रालयों द्वारा जारी किए गए विनियम

    राज्य की ईवी नीतियां:

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    क्र.सं.

    राज्य

    राज्य ईवी नीति

    1.  

    आंध्र प्रदेश

    https://www.acma.in/uploads/doc/AP%20Policy_final.pdf

    1.  

    कर्नाटक

    https://kum.karnataka.gov.in/KUM/PDFS/KEVESPPolicyInsidepagesfinal.pdf

    1.  

    केरल

    https://anert.gov.in/sites/default/files/inline-files/go20190310_Trans-24-Ms_e_vehicle_policy_.pdf

    1.  

    दिल्ली

    https://transport.delhi.gov.in/sites/default/files/All-PDF/Delhi_Electric_Vehicles_Policy_2020.pdf

    1.  

    महाराष्ट्र

    https://www.msins.in/guidelines_docs/english/EV_Policy.pdf

    1.  

    उत्तराखंड

    https://www.siidcul.com/upload/industrialPolicy/electric1576487934.pdf

    1.  

    मध्य प्रदेश

    http://mpurban.gov.in/Uploaded%20Document/guidelines/1-MPEVP2019.pdf

    1.  

    तमिलनाडु

    https://cms.tn.gov.in/sites/default/files/go/ind_e_176_2019.pdf

    1.  

    उत्तर प्रदेश

    http://udyogbandhu.com/DataFiles/CMS/file/Electrical%20%20vehicle%20policy_english_Aug7_2019.pdf

    1.  

    तेलंगाना

    https://tsredco.telangana.gov.in/Updates_2020/Telangana_EVES_policy_2020_30.pdf

    1.  

    बिहार

    http://www.investbihar.co.in/Download/Draft_for_e_vechile.pdf

    1.  

    गुजरात

    https://wri-india.org/sites/default/files/3.D1_S1_Gujarat%20State%20EV%20Draft%20Policy_Akash%20Davda.pdf

    1.  

    पंजाब

    http://punjabtransport.org/Punjab%20EV%20Policy_Final%20Draft%2015112019_Upload.pdf

    1.  

    चंडीगढ़

    https://evreporter.com/chandigarh-ev-policy-2019/

    1.  

    हरियाणा

    https://haryanatransport.gov.in/sites/default/files/Electric%20Vehicle%20Policy_2.pdf

  • -->

    राज्‍य इलेक्‍ट्रिक वाहन टैरिफ

    -->

    क्र.सं.

    राज्य

    राज्य विद्युत विनियामक आयोग (एसईआरसी) द्वारा अनुमोदित टैरिफ आदेश *

    1.  

    उत्तर प्रदेश

    https://www.upenergy.in/site/writereaddata/UploadNews/corrigendum/pdf/C_201903141428135216.pdf

    1.  

    पंजाब

    http://pserc.gov.in/pages/7.%20Chapter%207%20PSPCL%20Tariff%20Order%20FY%202020-21.pdf

    1.  

    गुजरात

    https://www.gercin.org/wp-content/uploads/document/549522c6-8a24-4049-8c17-a99a01b6b351.pdf

    1.  

    चंडीगढ़

    http://chdengineering.gov.in/pages/Tariff-Order-FY-2020-21.pdf

    1.  

    तेलंगाना

    http://www.tsnpdcl.in/Amendment%20tariff%20order

    1.  

    कर्नाटक

    https://karunadu.karnataka.gov.in/Tariff%20Order%202019/BESCOM/8-BESCOM%20-%20CHAPTER%20-%20%206.pdf

    1.  

    आंध्र प्रदेश

    http://aperc.gov.in/admin/upload/RSTFY2021.pdf

    1.  

    केरल

    https://erckerala.org/orders/ARR%20ERC%20-%202018-19%20to%202021-22.pdf

    1.  

    दिल्ली

    http://www.derc.gov.in/sites/default/files/Tariff%20Schedule%202020-21.pdf

    1.  

    महाराष्ट्र

    https://www.mahadiscom.in/consumer/wp-content/uploads/2020/04/Commercial_Circular_for_MYT_Order-3.pdf

    1.  

    उत्तराखंड

    http://www.uerc.gov.in/ordersPetitions/orders/Tariff/Tariff%20Order/2020-21/UPCL/Admittance%20Order.pdf

    1.  

    मध्य प्रदेश

    http://www.mperc.in/Retail%20Supply%20Tariff%20Order%20for%20FY%202020-21.pdf

    1.  

    झारखंड

    https://jbvnl.co.in/upload/0IOKV9.jbvnl%20tariff%20order%202020-2021.pdf

    1.  

    हरियाणा

    https://uhbvn.org.in/staticContent/documents/Tariff.pdf

    1.  

    छत्तीसगढ़

    http://www.cserc.gov.in/upload/upload_news/04-07-2020_15938599571.pdf

    1.  

    राजस्थान

    https://rerc.rajasthan.gov.in/rerc-user-files/office-orders

    * टैरिफ आदेशों के उपर्युक्‍त लिंक को 11 फ़रवरी 2021 को अपडेट किया गया है।

    होम चार्जिंग के लिए अनंतिम मालिकाना लागत कैलकुलेटर (ईवी वी/एस आईसीई वाहन)

    विद्युत मंत्रालय द्वारा दिनांक 12.12.2018 को जारी “इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग अवसंरचना - दिशानिर्देश और मानक” के प्रावधान के तहत राज्य नोडल एजेंसियां

    "इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवीएस) के लिए चार्जिंग अवसंरचना – संशोधित दिशानिर्देश और मानक" 01.10.2019 को जारी किए गए।